***हम बन ना सके इन्सान कभी,…


वन्दे मातरम दोस्तों,

***भगवान बनने के रखी तमन्ना,
हम बन ना सके इन्सान कभी,…
***दुसरे के सुख से सदा दुखी रहे,
खुद के सुख का न किया सम्मान कभी,…

उस उपर वाले ने संसार बनाते समय किसी के लिए कोई भेदभाव नही किया मगर हमने भेद भाव की सेकड़ों दीवारें खड़ी कर दी इसी पर कुछ लिखने की एक छोटी सी कोशिश है.

उसने तो बनाया था इंसान ही हमे,
हमने ही उसे हिन्दू, मुसलमान बनाया…………..
उसने तो बख्सी थी जमी एक ही हमको,
हमने ही उसपे हिंद, चीन, पाकिस्तान बसाया………..
उसने तो दी थी फक्त तालीम प्यार की,
हमने ही नफरतो से दुनिया को श्मसान बनाया…….
उसने तो बनाया था संसार स्वर्ग सा,
हमने बेमतलब जहाँ को कब्रिस्तान बनाया………

4 thoughts on “***हम बन ना सके इन्सान कभी,…

  1. इस नए और सुंदर से चिट्ठे के साथ आपका हिंदी ब्‍लॉग जगत में स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

  2. शानदार प्रयास बधाई और शुभकामनाएँ।

    एक विचार : चाहे कोई माने या न माने, लेकिन हमारे विचार हर अच्छे और बुरे, प्रिय और अप्रिय के प्राथमिक कारण हैं!

    -लेखक (डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश') : समाज एवं प्रशासन में व्याप्त नाइंसाफी, भेदभाव, शोषण, भ्रष्टाचार, अत्याचार और गैर-बराबरी आदि के विरुद्ध 1993 में स्थापित एवं 1994 से राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली से पंजीबद्ध राष्ट्रीय संगठन-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान- (बास) के मुख्य संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। जिसमें 05 अक्टूबर, 2010 तक, 4542 रजिस्टर्ड आजीवन कार्यकर्ता राजस्थान के सभी जिलों एवं दिल्ली सहित देश के 17 राज्यों में सेवारत हैं। फोन नं. 0141-2222225 (सायं 7 से 8 बजे), मो. नं. 098285-02666.
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