***नर तूने हर रूप में ही, नारी से छल हर बार किया

माँ, बहन, बीबी, बेटी बन, नारी ने तुझको प्यार दिया,
नर तूने हर रूप में ही, नारी से छल हर बार किया …………
माँ
वह नारी जिसने माँ बन कर, ये दुनिया हमको दिखलाई,
टेडी मेडी कटीली राहों पर, हर पल साथ हमारे वो आई,
खुद का पेट भरा ना भरा, पर भूखा हमे सोने ना दिया,
वह जिसकी ऊँगली थाम के ही, आई हम पर तरूणाई,
जब ब्याह हुआ उस माँ को भूले लगी हमे पत्नी प्यारी,
जन्मदायनी माँ हमको, अब लगी महज साधारण नारी,
बहन
बालापन जब आया हम पर, बहन ने हमको प्यार दिया,
राखी बाँधी तेरी कलाई, भैया दूज माथे को सिंगार दिया,
साथ में खेले लड़े झगड़े, और एक साथ ही बड़े हुए,
एकाकी तेरे बचपन को, बहना ने ही आधार दिया,
उसी बहना ने जब प्यार किया, तो खूँ तुझपे सवार हुआ,
राखी के सारे वचन भुला, तूने बहना को ही मार दिया,
बीबी
फिर आई जवानी एक युग नया, तेरे जीवन में आया,
एक तरूणी के यौवन में, तू डूबा, झूमा इतराया,
कसमे खाई विवाह बेदी पर, सात जन्म तक साथ निभाऊँ,
शादी के बाद कुछ समय तू, प्रेम में उसके बौराया,
गुजरे साल एक या दो, तू सात जन्म का बंधन भूल गया,
दहेज की बलि बेदी पर तूने, जीवन साथी को भेंट चढ़ाया,
बेटी
तेरी पत्नी माँ बनने को है, जब तुझको ये ज्ञान हुआ,
तू बेटे का बाप बनेगा, तुझको बड़ा गुमान हुआ,
अल्ट्रासाउंड में तुझको जब, गर्भ में बेटी का पता चला,
गर्भ में बेटी मरवाई, तू इन्सां से हैवान हुआ,
गर गलती से बेटी जन्म गई, तू फिर कत्ल की करता तैयारी,
माँ, बहन, बीबी के बाद, अब बिटिया की है बलि वारी,

उसने तुझको जीवन दे, ममता और दुलार दिया,
सबल हो तूने सबला को, मारा, पीटा, दुत्कार दिया………

7 thoughts on “***नर तूने हर रूप में ही, नारी से छल हर बार किया

  1. वन्दे मातरम दोस्तों,
    खबरों की दुनियाँ ,भाईदिगम्बर नासवा जी, भाईडॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" जी,अनुपमा जी और संगीता जी होसला अफजाई के लिए आपका धन्यवाद,
    हम अपने आपको बेहद प्रगतिशील कहते हैं ………. मगर नारी (खास कर अपनी पत्नी ) के बारे में हमारी सोच बेहद संकीर्ण हो जाती है, मैं सोचता हूँ की इन हालत में कुछ परिवर्तन होना ही चाहिए

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