चिता पे बैठ शान्ति गीत गा रहा है दोस्तों,

चिता पे बैठ शान्ति गीत गा रहा है दोस्तों,
आदमी ही आदमी को खा रहा है दोस्तों ………..
देह की भूख प्यारे, प्यार पथ ले गई,
मजबूरी वश नेह धर्म निभा रहा है दोस्तों …………..
माँ ओ बीबी की जंग जिन्दगी बदरंग सी,
अजीब दुविधा में खुद को पा रहा है दोस्तों ………….
बेटियों को मार और बहनों को कत्ल कर,
प्रगति शील खुद को कहा रहा है दोस्तों,……………
जंगलों का छरन कर मंगल की कामना.
जहर जिन्दगी में नित बसा रहा है दोस्तों ………..
सरकारी पाले में है मौज करने को वो,
दिखावे को ही गाल बजा रहा है दोस्तों …………..
सबके अपने गीत हैं सबकी अपनी प्रीत है,
पर महफिले दुश्मनी सजा रहा है दोस्तों ………….

5 thoughts on “चिता पे बैठ शान्ति गीत गा रहा है दोस्तों,

  1. वन्दे मातरम आदरणीय मयंक जी,
    मेरी रचना आपको पसंद आई और रचना को चर्चा मंच पर स्थान देने के लिए आपका हार्दिक आभार

  2. वन्दे मातरम आदरणीय रंजन जी,
    हौसला अफजाई के लिए आपका हार्दिक आभार

  3. सरकारी पाले में है मौज करने को वो,
    दिखावे को ही गाल बजा रहा है दोस्तों …………..
    सबके अपने गीत हैं सबकी अपनी प्रीत है,
    पर महफिले दुश्मनी सजा रहा है दोस्तों …

    सुन्दर प्रस्तुति,,,,,

    RECENT POST…: दोहे,,,,

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *