बिहार :- अररिया ओमनगर वार्ड न. 8 में हुई लाखों की ठगी

ओमनगर वार्ड नम्बर 8 में बिजली ऑफिस के सामने शंकर यादव के मकान में भारतीय पावरलूम उधोग नाम से एक संस्था 11/08/2018 को खोली गई थी जिसके मालिक हरी शिवहरे व दीपक शिवहरे हैं, इनका गिर्राज बोहरे नाम का एक पार्टनर था जो मुख्यतः मैनेजर के रूप में शाखा में बैठता था। इनके यहां श्याम शिवहरे और सुधाकर नाम के 2 लोग और भी थे। ये सभी लोग मध्यप्रदेश के भिंड जिले के रहने वाले है। इसके अलावा राकेश गुप्ता नाम का एक व्यापारी भी इनके ऑफिस पर दिन में रहता था जो की दिल्ली का रहने वाला था। और अपने पैसों के लिए जमकर इनके ऑफिस पर बैठ गया था। सुरेंद्र यादव और देवेंद्र शिवहरे इनके 2 पार्टनर और है जो पर्दे के पीछे से इनकी आर्थिक मदद करते है और कभी भी पुलिस कार्यवाही होने पर ये इन्हें बचाने के लिए आ जाते हैं क्योंकि इन्हें ठगे गए लोगों में से कोई पहचानता नही है। मुख्यतः सुरेंद्र यादव पुलिस से सम्बन्ध निकालने में माहिर है और धार जिला मध्यप्रदेश में बड़ी पुलिस कार्यवाही होने के बाद भी लेनदेन व सिफारिश करके इन्हें बचाने के लिए जाना जाता है।

इन सभी लोगों के काम अलग अलग बटे हुए थे। हरी शिवहरे, दीपक शिवहरे, श्याम शिवहरे व सुधाकर का काम मुख्यतः मोटरसाइकिल से ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को अपनी स्कीम समझकर एडवांस लेना था। मैनेजर गिर्राज का काम ऑफिस पर आए लोगों को शीशे में उतारकर जल्दी से जल्दी माल बेचना था।

ऊपर से देखा जाए तो इस पूरे प्रकरण में ठगी जैसा कुछ नही है, भारतीय पावरलूम उद्योग रानीपुर झांसी की एक रजिस्टर्ड संस्था है जो सम्भवतः हथकरघा वस्त्र बनाती है। मगर गहराई में जाने पर सम्पूर्ण कहानी बदली हुई नजर आती है, ये लोग अपनी सूचना में लिखे नियमो को इतना जायकेदार बनाकर परोसते हैं कि आम ग्रामीण बहुत जल्दी इनके झांसे में आ जाते है। और इनको पैसा दे देते हैं।

इनकी कार्य प्रणाली

ये लोग मासूम लोगों को पहले पूरी तरह विश्वाश में लेते है इसके लिए ये किसी क्षेत्रीय व्यक्ति को अपना एजेंट बनाते है, जिसको ये 20000 या अधिक के वेतन पर नोकरी पर रखते है और/या उसको हर ऑर्डर पर कुछ कमीशन भी देते हैं। इन एजेंटों का काम ग्रामीणों में संस्था की साख पैदाकर उन्हें संस्था का डीलर बनाना होता है जिनको संस्था अनेको सुविधाएं देती है।

अररिया में भी साकिर, धामा जी, मोकिम ओर मुद्दसर इनके एजेंट थे जिन्होंने 30 या अधिक लोगों को संस्था से जुड़वाया था। ये बेचारे एजेंट लोगों के साथ ठगी हो रही है के बारे में तब तक नही जान पाते जब तक संस्था भाग नही जाती।

इन लोगों का एक तय कार्यक्रम होता है कि हमे इतनी तारीख को भागना है उसी के अनुसार ये प्लांनिग करके लोगों को कहते है कि अपना जल्दी से जल्दी माल उठा लो आपको फर्नीचर का पैसा नगद मिलेगा। इसके 2 फायदे होते है 1 इनका जल्दी ही माल बिक जाता है दूसरा ये लोगों को उधार की स्कीम बांटते है उस स्कीम के अनुसार 20000 रुपये एडवांस जमा करने पर 2 लाख का 50000 रुपये एडवांस जमा करने पर 5 लाख का माल उधार दिया जाएगा क्योंकि अब आप संस्था के डीलर है और संस्था की ओर से आपसे ज्यादा सेल करवाने के लिए ज्यादा माल देने की योजना की बात की जाती है। बड़ी बात ये है कि फर्नीचर या उधार माल के नाम पर लिए गए पैसों की ये किसी प्रकार की कोई रसीद नही देते है। और फिर नियत प्रोग्राम के तहत ये रात को भाग जाते हैं।

इनपर कहाँ दर्ज हैं FIR

भिंड के रहने वाले ये लोग मूलतः शिवहरे समाज से व ब्राह्मण समाज से ताल्लुक रखने वाले लगभग 100 लोग हैं। इनपर 420/34 व अन्य धाराओं में कई केस दर्ज है।

हरियाणा के भिवानी, विजयपुर जिला श्योपुर मध्यप्रदेश, राजस्थान के सीकर आदि अनेक जिलों में इन पर FIR दर्ज हैं। खरोरा (रायपुर), राजनांदगांव छत्तिसगड़ में भी इन लोगों पर FIR दर्ज हैं।

क्यों हैं जिनके हौसले बुलंद

लगातार FIR होने के बाद भी इन लोगों को पुलिस का कोई डर नही है क्योंकि इनको पता है कि लगभग 30 वर्ष से लगातार ठगी करने के बाद भी इनपर बमुश्किल 10 FIR दर्ज हुई है, अमूमन या तो ठगे गए ग्रामीण लोग पुलिस के पास पहुंच ही नही पाते और अगर पहुंच भी जाएं तो पुलिस इनसे ही अपराधियों जैसा सलूक करती है जिससे ठगे गए लोगों की हिम्मत टूट जाती है। पुलिस के सहयोग न करने की मुख्य वजह इन भागे हुए लोगों को कहाँ ढूंढा जाएगा होती है, इसलिए पुलिस FIR नही करती है। इसलिए ये कभी पकड़े नही जाते।

क्या है संस्था और इन्हें माल देने वाले व्यापारियों का रोल

रानीपुर झांसी के अंदर बहुत सारी हथकरघा व बुनकर संस्थाए हैं जिनसे ये माल खरीदते है या उनसे संस्था की ब्रांच किसी शहर में डालकर बिक्री बढ़ाने की बात करके उनसे रजिस्ट्रेशन आदि की फोटो कॉपी ले लेते हैं। बाद में उन्ही की संस्था के नाम से फर्जी कागजात छपवाकर अपना कार्य शुरू कर देते है। जबकि असलियत में संस्था मालिक को इनके द्वारा कुछ भी किये जाने की जानकारी नही होती है। हथकरघा के अतिरिक्त ये पावरलूम और रेडीमेड का माल सूरत, दिल्ली या लोकल के व्यापारियों से नगद या उधार खरीदते हैं उन्हें भी ठगी की कोई जानकारी या ठगी से कोई मतलब नही होता है, व्यापारी का मुख्य मकसद अपना माल अच्छी कीमत पर बेचना होता है।

मुख्य घटनाक्रम

14 अक्तूबर को राकेश गुप्ता सीमांचल एक्सप्रेस से दिल्ली वापिस आ गए और ऑफिस से राकेश गुप्ता के हटते ही हरी, गिर्राज व दीपक के दिमाग ने कैसे लोगों से पैसा लेना है कि घटना को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया जिसकी भूमिका ये पहले ही बांध चुके थे। जिन्होंने 15 ओर 16 अक्तूबर को लोगों से फर्नीचर व उधार माल देने के नाम पर लोगों से लाखों रुपये इकट्ठा किये और 16 अक्टूबर की रात में भाग आये। इनमे सम्भवतः सुधाकर एक ऐसा व्यक्ति रहा हो जिसे इस पूरे घटनाक्रम की कोई जानकारी नही थी।

आगे क्या हुआ

पुलिस अधीक्षक अररिया

जब राकेश गुप्ता ने 17 अक्टूबर को इन लोगों को फोन किया तो इनके सभी नम्बर ऑफ पाए गए। 18 अक्तूबर को राकेश गुप्ता ने दीपक के एजेंट साकिर को फोन किया तो साकिर ने बताया कि आप कहाँ हो ऑफिस पर ताला पड़ा है, लोग कह रहे है कि तुम भाग गए हो। इसके बाद राकेश गुप्ता ने पूरी घटना की जानकारी SP साहब अररिया को फोन से दी व उनको मेल भी किया। इसके बाद वहां के ठगे गए लोगों और पुलिस ने क्या किया, इसकी पड़ताल करके हम बाद में बताएंगे मगर सम्भवतः अब तक इस मामले में पुलिस द्वारा कोई कार्यवाही नही की गई है, क्योंकि पीड़ित पुलिस के पास ना जाकर वकीलों के चक्कर काट रहे है। शायद उन्हें किसी कारण पुलिस पर भरोसा नही है।

पूरी खबर राकेश गुप्ता द्वारा दी गई सूचना पर आधारित है, उनका कहना है कि अररिया पुलिस जब चाहेगी तब इन सभी को भिंड जिले के इनके घर तक पहुंचा दिया जाएगा।

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