समपूर्ण हिंदी भाषी भारत में सहकारी समितियों (कपड़ा) के नाम पर चल रहा है पिछले 30 साल से ठगी का कारोबार

समपूर्ण हिंदी भाषी भारत में सहकारी समितियों (कपड़ा) के नाम पर चल रहा है पिछले 30 साल से ठगी का कारोबार

इस खबर को आप सभी ध्यान से पढ़ियेगा, खास कर पुलिस, प्रसासन, पत्रकार और NGO से जुड़े लोगों को ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, बिहार, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान,हरियाणा और जम्मू कश्मीर में मध्यप्रदेश के भिंड जिले के ठग सक्रिय है, ये लोग ऊपर दिए हिंदी बोलने और समझने वाले प्रदेशों में कपड़ा समितियों के नाम पर ठगी कर रहे है।
कैसे करते हैं शुरुआत।
ये लोग किसी भी जिले या तहसील में या ब्लॉक में जाकर अपना एक ऑफिस बनाते हैं, किराए की इस मकान को लेते समय ये जो id देते है वह असली होगी मगर पता वह होगा जहाँ वे कभी मिलेंगे नही। कई बार पुह ID भी नकली होती है पुलिस को कभी ये अपने आने की जानकारी नहीं देते है, ये लोग MP 07 या MP 30 नम्बर की मोटरसाइकिल से ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर भोले लोगों को अपना शिकार बनाते है।
इनकी कार्यप्रणाली
ये एक सूचना पत्र को ग्रामीणों को पढ़वाते हैं जो निम्न में से किसी एक संस्था या ऐसी ही किसी अन्य संस्था का होता है।
1.भारतीय पावरलूम उद्योग।

प्रतीकात्मक इमेज

हथकरघा वस्त्र औधोगिक उत्पादन सहकारी समिति।

बुनकर सहकारी समिति।

हथकरघा सहकारी समिति।

शक्ति हैंडलूम सहकारी समिति।

दीप बुनकर सहकारी समिति।

7.आदर्श बुनकर सहकारी समिति।
आदि और ये या इसी से मिलती जुलती कोई संस्था हो सकती है। ये सभी संस्थाएं रानीपुर झांसी उत्तर प्रदेश की है। कुछ संस्थाएं ग्वालियर, टीकमगढ़ और इटावा से भी रजिस्टर्ड हैं।

सूचना पत्र

इन सभी समितियों के सूचना पत्र में मुख्यतः ये लिखा होता है।

कोई भी इनका डीलर बन सकता है।

एक पंचायत में एक ही डीलर होगा।

डीलर की नियुक्ति 2 व्यक्तियोँ की सिफारिश पर होगी।

डीलर अपना पैसा लगाकर काम करेगा, बाद में जिला संचालक की सिफारिश आने पर माल उधारी पर मिल सकता है।

डीलर को कैंची, मीटर, बोर्ड, आने जाने का किराया संस्था देगी।

डीलर को 40000 से 60000 से या 1लाख से डीलर बनने पर क्रमशः 500 रुपया, 1000 रुपया, 2000 रुपया किराया प्रति माह दिया जाएगा।

डीलर का जो माल नही बिकता बदल दिया जाता है।

डीलर को 20 प्रतिशत कमीशन बिक्री पर दिया जाता है।

डीलर को 1लाख रुपये की सेल करने पर 10000 रुपये बोनस के दिये जाते हैं।

इसी सूचना के आधार पर अधिकतर लोगों को ठगा जाता है, आइए समझते हैं कैसे।

इनकी कार्य प्रणाली

ग्रामीण व्यक्ति को इस सूचना के आधार पर बड़े ही लच्छेदार तरीक़े से समझाया जाता है कि तुम तो एक बार शुरुआत करो, हर महीने तुम्हें किराया तो मिलेगा ही चाहे माल थोड़ा बिके या ज्यादा, अगर तुम्हारा माल नही बिकेगा तो तुम्हारा जाएगा क्या, बिना बिका माल वापिस हो जाएगा, नही काम चला तो पूरी दुकान वापिस हो जाएगी, तुम जो कपड़ा मांगोगे तुम्हें दिया जाएगा। और तुम्हारी पूंजी एक बार ही लगनी है फिर तुम्हे उधार मिल ही जायेगा, आदि आदि अनेक मुंगेरीलाल के हसीन सपने दिखा कर रातों रात लखपति बना देते है। और इस काम मे इनका साथ देते हैं वो क्षेत्रीय लोग जो बेहतर जिन्दगी की आस में इनके हाथों की कठपुतली बन जाते है उन्हें इनके असली इरादों की इनके भाग जाने तक भनक ही नही लगती है। ये तो 10/20 हजार रुपये प्रतिमाह के वेतन या प्रति ऑर्डर कमीशन के ऊपर होते हैं वह भी अधिकांशतः इनको मिलता नही है।

ये लोग इन एजेंटों के सहारे ग्रामीणों में अपना विश्वास जमाते है, फिर लोगों को 10 प्रतिशत पैसा जमा करके अपना डीलर बनाते है, उसके बाद इनको जल्दी कपड़ा खरीदने के लिए एक लालच देते हैं की आप उस तारीख तक कपड़ा उठा लोगे तो तुम्हे फर्नीचर के पैसे के रूप में, अलमारी या अन्य किसी रूप में इनाम दिया जाएगा। इन्ही एजेंटों के द्वारा डीलर को समझाया जाता है कि ज्यादा पूंजी से दुकान शुरू करो जिससे आपकी दुकान का किराया ज्यादा मिले। कम काम हो तो बाद में अपनी पूंजी कम कर देना मगर आज फार्म भरते समय जो किराया तय हो जाएगा वही आखिर तक मिलेगा।

ये बेचारे एजेंट लोगों के साथ ठगी हो रही है के बारे में तब तक नही जान पाते जब तक संस्था भाग नही जाती।

हम पुरजोर तरीके से कहना चाहते हैं ये एजेंट अनजाने में ही इनकी साजिस का हिस्सा हो जाते हैं, जबकी वास्तव में सबसे ज्यादा परेशान इनके भागने के बाद ये ही एजेंट होते हैं।

क्या है माल बिक्री और कमीशन का फंडा

ये जो कपड़ा डीलर को देते हैं उसपर रेट का एक सिम्पल पैटर्न होता है कि होलसेल में जो ये 100 रुपये का कपड़ा खरीदते है उस पर 50 प्रतिशत बढ़ाकर रेट डालते है मतलब 150 रुपये, और फिर ग्राहक को समझाते हैं कि ये 150 रुपये के हिसाब से बिक्री करना है इस पर संस्था तुम्हे 20 प्रतिशत कमीशन और 10 प्रतिशत बोनस जोड़कर हर महीने 30 प्रतिशत कमीशन माल की बिक्री पर दिया जाएगा, इस प्रकार 150 रुपये का कपड़ा केवल 105 रुपये का तुम्हे पड़ेगा, ग्राहक उस कपड़े को बाजार में कहीं भी तलासेगा तो यह कपड़ा 110 से कम का लोकल होलसेल में नही होगा, क्योंकि दुकानदार इस कपड़े पर GST और माल किराया लगाकर ही बताएगा। इस तरह पहली नजर में इनका कपड़ा बाजार से सस्ता ही नजर आएगा।

इसके बाद ये समझाते है कि कपड़ा ले जाने के बाद यदि खराब निकलता है तो, धुला हुआ कपड़ा भी वापिस लेकर हम आपको दूसरा कपड़ा दे देते है, जबकि लोकल व्होलसेलर या रिटेल कपड़े की दुकान पर स्पष्ट लिखा होता है फैशन के इस दौर में गारंटी की इच्छा ना करें, मतलब इनका कपड़ा बाजार से सस्ता भी और गारंटीड भी।

इसके बाद ये डीलर को समझाते है कि आप अपना पैसा लगाकर दुकान खोलेंगे तो कोई आपको दुकान किराया नही देगा हम आपको 500 रुपये से लेकर 10000 रुपया महीने तक दुकान का किराया देते है, जब तक आपकी दुकान चले तब तक चलाओ, तब तक का दुकान का किराया संस्था तुम्हे हर महीने देगी और अगर कभी आपको लगे तो आप दुकान बंद करके अपना सारा कपड़ा वापिस करके अपना पूरा पैसा संस्था से वापिस ले लोगे। मतलब पैसे की 100 प्रतिशत सुरक्षा।

सबसे पहले जो मैं बताना भूल गया वह यह है कि यह सरकारी कंट्रोल रेट की कोटे की दुकान है जैसे गाँव मे राशन और केरोसिन का कोटा होता है उसी प्रकार।

पहले से निर्धारित होता है कब इन्हें भागना है।

इन लोगों का एक तय कार्यक्रम होता है कि हमे इतनी तारीख को भागना है उसी के अनुसार ये प्लांनिग करके लोगों को कहते है कि अपना जल्दी से जल्दी माल उठा लो आपको फर्नीचर का पैसा नगद मिलेगा। इसके 2 फायदे होते है 1 इनका जल्दी ही माल बिक जाता है दूसरा ये लोगों को उधार की स्कीम बांटते है उस स्कीम के अनुसार 20000 रुपये एडवांस जमा करने पर 2 लाख का 50000 रुपये एडवांस जमा करने पर 5 लाख का माल उधार दिया जाएगा क्योंकि अब आप संस्था के डीलर है और संस्था की ओर से आपसे ज्यादा सेल करवाने के लिए ज्यादा माल देने की योजना की बात की जाती है। बड़ी बात ये है कि फर्नीचर या उधार माल के नाम पर लिए गए पैसों की ये किसी प्रकार की कोई रसीद नही देते है। और फिर नियत प्रोग्राम के तहत ये रात को भाग जाते हैं।

कुछ और भी करते हैं ये भागने से पूर्व।

जिस रात को इनको भागना होता है उसके एक दिन पहले ये अपने उन डीलरों के पास जाते है जिन्हें कपड़ा बदलना या दुकान बंद करनी होती है, उन्हें कहा जाता की अचानक बड़े साहब आ गए है आप अपना माल जमा कर दो आपका माल बदलकर नया माल आपको मिल जाएगा, और दुकान बंद करने वाले को उसका पूरा पैसा वापिस मिल जाएगा, इस प्रकार ये लोगों से कपड़ा भी वापिस ले आते है, मतलब पैसा भी ले लिया और माल भी वापिस ले लिया।

इनपर कहाँ दर्ज हैं FIR

भिंड के रहने वाले ये लोग मूलतः शिवहरे समाज से व ब्राह्मण समाज से ताल्लुक रखने वाले लगभग 100 लोग हैं। इनपर 420/34 व अन्य धाराओं में कई केस दर्ज है।

हरियाणा के भिवानी, विजयपुर जिला श्योपुर मध्यप्रदेश, राजस्थान के सीकर आदि अनेक जिलों में इन पर FIR दर्ज हैं। खरोरा (रायपुर), राजनांदगांव छत्तिसगड़ में भी इन लोगों पर FIR दर्ज हैं। इसके अतिरिक्त भी अन्य FIR इन पर दर्ज है जिनकी हमे ठीक से जानकारी नही है।

क्यों हैं जिनके हौसले बुलंद

लगातार FIR होने के बाद भी इन लोगों को पुलिस का कोई डर नही है क्योंकि इनको पता है कि लगभग 30 वर्ष से लगातार ठगी करने के बाद भी इनपर बमुश्किल 10 FIR दर्ज हुई है, अमूमन या तो ठगे गए ग्रामीण लोग पुलिस के पास पहुंच ही नही पाते और अगर पहुंच भी जाएं तो पुलिस इनसे ही अपराधियों जैसा सलूक करती है जिससे ठगे गए लोगों की हिम्मत टूट जाती है। पुलिस के सहयोग न करने की मुख्य वजह इन भागे हुए लोगों को कहाँ ढूंढा जाएगा होती है, इसलिए पुलिस FIR नही करती है। इसलिए ये कभी पकड़े नही जाते।

क्या है संस्था और इन्हें माल देने वाले व्यापारियों का रोल

रानीपुर झांसी के अंदर बहुत सारी हथकरघा व बुनकर संस्थाए हैं जिनसे ये माल खरीदते है या उनसे संस्था की ब्रांच किसी शहर में डालकर बिक्री बढ़ाने की बात करके उनसे रजिस्ट्रेशन आदि की फोटो कॉपी ले लेते हैं। बाद में उन्ही की संस्था के नाम से फर्जी कागजात छपवाकर अपना कार्य शुरू कर देते है। जबकि असलियत में संस्था मालिक को इनके द्वारा कुछ भी किये जाने की जानकारी नही होती है। हथकरघा के अतिरिक्त ये पावरलूम और रेडीमेड का माल सूरत, दिल्ली या लोकल के व्यापारियों से नगद या उधार खरीदते हैं उन्हें भी ठगी की कोई जानकारी या ठगी से कोई मतलब नही होता है, व्यापारी का मुख्य मकसद अपना माल अच्छी कीमत पर बेचना होता है।

इनमे कुछ लोगों के नाम जो हमारी जानकारी में है। हरी शिवहरे, गिरराज बोहरे, देवेंद्र शिवहरे, दीपक शिवहरे, श्याम शिवहरे, रामकुमार सरपंच, संजीव, संजय, धर्मेंद्र, रामू ओझा, जीतू शिवहरे, राम सिंह आदि 100 के लगभग लोग, 15/20 ग्रुप में बटकर देश के विभिन्न हिस्सों में है जो आज भी इस ठगी को कर रहे है।

हाल ही मैं कहाँ कहाँ की है इन्होंने ठगी

प्राप्त जानकारी के अनुसार अररिया, मोतिहारी बिहार में, स्वर्णकोट, राजौरी, कठुआ जम्मू कश्मीर में, हिंडौन राजस्थान में, बहालगढ़ हरियाणा में, एवम अन्य क्षेत्रों में इन्होंने हाल के 2 सालों में ठगी की है।

हम पुरजोर तरीके से आपको बताना चाहते है कि हिंदुस्तान के केवल वो क्षेत्र जो हिंदी समझ या बोल नही सकते इनकी ठगी से अछूते है। बाकी सम्पूर्ण हिंदी भाषी भारत के सभी प्रान्तों के, सभी जिलों की, सभी तहशीलों का एक एक गांव इनके द्वारा ठगा गया है। मगर इनके खिलाफ आज तक आवाज ना उठने का कारण प्रत्येक ग्राम में मात्र 1 व्यक्ति का ठगा जाना, उस व्यक्ति द्वारा लोगों को न बताया जाना, ग्रामिणों में जागरूकता नही होना, पुलिस और कोर्ट के झंझट में ना पड़ने की सोच और सबसे बड़ा कारण पुलिस का इन ठगे गए लोगों सहयोग ना करने का प्रण।

हमारी इस खबर का उद्देश्य

हम चाहते है कि भविष्य में इस प्रकार की ठगी ना हो, और जहाँ भी वर्तमान में ये लोग ठगी कर रहे है तुरन्त पकड़े जाएं, जहाँ से भी ये पूर्व में ठगी करके भागे हैं इनपर FiR दर्ज होकर कठोर कार्यवाही हो।

ठगों के ये 10/15 ग्रुप है, सभी एक दूसरे को बहुत अच्छी तरह जानते है, एक को पकड़ते ही पुलिस चाहे तो पूरे ग्रुप पुलिस की पकड़ में होंगे।

ख़बर का सोर्स

खबर इन्ही के बीच मे समय समय पर जाने वाले व्यक्ति द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित है जो पूर्णतया प्रमाणित है, पुलिस जब चाहे तब यह व्यक्ति पुलिस के सहयोग के लिए उपलब्ध होगा।

आप मे से बहुत से लोगों को जो ग्रामीण परिवेश से है इस ठगी के विषय मे जानकारी हो या मिल सकती है आप हमें इन ठगों को पकड़वाने में सहयोग करें। हम आपको विश्वास दिलाते है आपको किसी भी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा नही बनने देंगे सारी कार्यवाही हमारी व संघर्ष NGO की टीम द्वारा की जाएगी।

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