बुढ़ाना में झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार कहीं स्वास्थ्य विभाग की पनाह तो नही.

बुढ़ाना में झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार कहीं स्वास्थ्य विभाग की पनाह तो नही..
रिपोर्टर – शोयब कुरैशी

स्वास्थ्य विभाग की ओर से नहीं की जाती कोई भी कार्रवाई लोगों की जान से किया जरा रहा खिलवाड़….

बुढ़ाना।शहर की गलियों से लेकर मुख्य मार्गो पर डॉक्टरों की भरमार हो गई है। आलम यह है कि एक-एक गली में चार-चार क्लीनिक चल रहे हैं। बिना किसी डिग्री के छोटे से छोटे और बड़े से बड़े हर मर्ज का इलाज इनके यहां होता है। अगर मरीज थोड़ा ठीक भी है और इनके इलाज से अगर वो बीमार पड़ जाए तो इससे इनको कोई परवाह नहीं है। केवल अपनी आमदनी से मतलब है क्योंकि फीवर हो चाहे टाइफाइड हो चाहे कोई भी बीमारी हो इनको तो केवल ड्रीप चढ़ाने से अलावा कोई और मामला नहीं है क्योंकि इनको केवल अपनी आमदनी से मतलब है और इस स्वास्थ्य विभाग बिल्कुल अनजान बना बैठा है क्योंकि झोलाछाप डॉक्टरों को कहीं स्वास्थ्य विभाग की पनाह तो नहीं है…

दरअसल आपको बता दें कि
इन झोलाछाप डॉक्टरों का लक्ष्य सिर्फ चंद पैसे कमाना ही होता है। यही वजह है कि आए दिन गरीब तबके के लोग इन डॉक्टरों के शिकार हो जाते हैं। जिससे वे अपनी जान तक गंवा बैठते हैं। इसके बावजूद भी ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते।

आज तक भी किसी भी झोलाछाप डॉक्टर को नोटिस नहीं भेजा गया और ना ही उन पर कोई कार्रवाई की गई..

गली और मुख्य सडकों पर दुकान क्लीनिक खोले सैकड़ों झोलाझाप डाॅक्टरों में अब तक एक भी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई हैं। कई सालों से झोलाछाप डॉक्टरों का यह मामला चला रहा था स्थानीय लोगों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है लेकिन स्वास्थ्य विभाग कुंभकरण की नींद सोया हुआ है स्वास्थ्य विभाग की ओर से आज तक झोलाछाप डॉक्टरों को नोटिस तक नहीं भेजा गया है। इसके अलावा कोई कार्रवाई गर्इ। यहीं कारण है कि झोलाझाप डाॅक्टर स्वास्थ्य विभाग से जरा भी नहीं डरते।

गांव और शहर की गलियों वाले होते हैं इनके शिकार

झाेलाझाप डाॅक्टरों का शिकार शहर में कंस्ट्रक्शन साइटों में काम करने वाले मजदूर आैर गांव में रहने वाले गरीब लोग हो रहे हैं। ये लोग इन डाॅक्टरों से 50 से 1000 रुपये में दवार्इ ले लेते हैं। जिसका खामयाजा कर्इ बार उन्हें अपनी मौत को गले लगाकर चुकाना पडता है। अब तक एेसे कर्इ मामले सामने आ चुके हैं। जिसमें झोलाझाप डाॅक्टरों की दवार्इ से लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

स्वास्थ्य विभाग का भी नहीं है कोर्इ खौफ

शहर की गलियों व गांवों में सैकड़ों की संख्या में झोलाछाप डॉक्टर क्लीनिक चला रहे हैं। उन्हें पता है कि विभाग कभी छापेमारी करने नहीं आएगा चूंकि विभागीय अधिकारियों के साथ उनकी सांठ-गांठ रहती है। किसी शिकायत पर अगर छापेमारी हो भी जाती है तो इसकी जानकारी इन्हें पहले ही मिल जाती है। अवैध क्लीनिकों के अलावा अवैध मेडिकल स्टोर भी सैकड़ों की संख्या में चल रहे हैं। यही नहीं इन मेडिकल स्टोर पर उन दवाइयों को भी आसानी से लिया जा सकता है जिन पर बैन है। ग्राम हुसैनपुर कला रोड पर चल रहे है अवैध मेडिकल स्टोर दिन रात बैचा जा रहा है नशा

झापेमारी से पहले ही मिल जाती है जानकारी

सूत्रों का दावा है कि किसी भी झोलाछाप डॉक्टर और मेडिकल के खिलाफ जब भी किसी के द्वारा शिकायत करने पर छापेमारी की जाती है। तो इससे पहले ही उन्हें इस छापेमारी की जानकारी मिल जाती है। इसी का फायदा उठाकर ये झोलाछाप डाॅक्टर अपनी दुकान बंद कर मौके से गायब हो जाते हैं। …..

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